25 Rajjab Yaum e Shahdat Hazrat Imam Musa Kazim AlaihisSalam

Imam Musa Kazim As Ki Shahadat Ba’Tarikh 25 Rajab Ul Mujarrab 183 Hijry Yom-E- Juma Ko Wake Huii Aap As Ki Umrr Us Waqt 55 Saal Ki Thi,, 😭
Janab Mirza Dabiri Kahte Hain
Moula Par Intehaein Aseery Guzar Gayi 😭
Zindan Ma Peeri Jawani Guzar Gayi 😭
Shahadat Ke Baad Lash-E- Mubarak Moula As Ko Qaid Khan-E- Se Nikal Kar Baggad Ke Pul Par Daal Gee Gaya,, 😭
Aur Nihayat Touheen Alfaaz Me Ap As Ko Aur Apke Manne Walo Ko Yaad Kiya Gaya 😭
Log Badasha Ke Khauf Se Numaya Tour Par Mazammat Ki Jurrat Na Karte The,,
Taham Ek Giroh Ne Jiske Sardar Suleman Bin Jafar Ibn-E- Abi Jafar The,,
Himmat Ki Aur Lash-E- Mubarak Dushman’O Se Chheen Kar Gusl’O Kafan Ka Band’O Bass Kiya,, 😭
2500 Ka Kimty Kafan Diya Moula As Ko Jispe Pura Qur’an Likha Hua’n Tha,, 😭
Nihayat Tuzo Wa Ahtisham Se Janaza-E- Musa Ibne Jafar As Lekar Chale In Logo’n Ke Gireban Gham-E- Imam-E- Musa Ibne Jafar Me Chaak The,, 😭
Ye Intehae’n Gham WA Alam Ke Sath Janaza-E- Musa Ibn-E- Jafar As Ko Lekar Kar Maqbara-E- Quraish Me Pahuche,, 😭
Moula Imam-E- Raza Namaz Wa Dafan Ke Liye Madina Se Ba’Aejaaz Pahuch Chuke The,, 😭
Aap Jjh Ne Namaz Padhae Aur Apne Walid-E- Majid Ko Supurd-E- Khak Kiya,, 😭
besumarlanat
pursha😭😢💔🙏
( Akhu_ALi_Aabidi )

🏴 यौम ए शहादत इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम 🏴

इमामत की सातवीं कड़ी हज़रत इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम, हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के बेटे थे जिन्हें मदीना से हारून रशीद मलऊन के हुक्म के बाद सन 179 हिजरी में गिरफ़्तार किया गया और 25 रजब सन 183 हिजरी में शहीद कर दिया गया था। आप बग़दाद और बसरा की जेलों में ईसा इब्ने जाफ़र, फ़ज़्ल इब्ने रबीअ, फ़ज़्ल इब्ने यह्या और सिंदी इब्ने शाहिक की निगरानी में रहे। इमाम मूसा काज़िम अ.स. ने क़ैद के 14 साल ज़िंदगी में बहुत कठिन परिस्तिथियों का सामना किया।
 
ईसा इब्ने जाफ़र
 
बसरा के इस हाकिम ने हारून रशीद मलऊन के हुक्म से इमाम अ.स. को एक साल अपनी निगरानी में रखा, लेकिन ईसा इब्ने जाफ़र, इमाम काज़िम अ.स. पर सख़्ती नहीं करता था, जिन दिनों इमाम अ.स. ईसा इब्ने जाफ़र की निगरानी में थे हारून ने उसे ख़त लिखा कि इमाम अ.स. को क़त्ल कर दे, ईसा ने अपने कुछ क़रीबी लोगों से मशविरा किया और उन लोगों ने इस जुर्म को अंजाम देने से उसे रोक दिया जिसके बाद ईसा ने हारून को ख़त का जवाब इस तरह लिखा कि मूसा इब्ने जाफ़र (इमाम काज़िम अ.स.) को मेरी निगरानी में क़ैद किए हुए काफ़ी समय बीत चुका है मैंने इतने समय में कई जासूसों द्वारा पता लगाया लेकिन हर बार हमारे जासूस यही ख़बर लाते कि इमाम अ.स. इबादत से थकते ही नहीं हैं वह केवल अल्लाह की इबादत करते रहते हैं और वह अपने लिए मग़फ़ेरत और रहमत के अलावा कोई दुआ नहीं करते, इसलिए अगर किसी को इन्हें मेरे पास से लेने भेजते हो तो ठीक वरना मैं उनको आज़ाद कर दूंगा क्योंकि मैं उन्हें क़ैद में रख कर ख़ुद बहुत परेशान हो गया हूं।

फ़ज़्ल इब्ने रबीअ
 
ईसा इब्ने जाफ़र इब्ने मंसूर के ख़त से हारून रशीद बौखला गया क्योंकि उसे डर था कि कहीं ईसा उनको रिहा न कर दे जिससे उसकी सारी साज़िशें बेकार हो जाएं, इसीलिए उसने अपने किसी आदमी को भेज कर इमाम अ.स. को बसरा से बग़दाद बुला कर फ़ज़्ल इब्ने रबीअ की निगरानी में क़ैद कर दिया।

शैख़ मुफ़ीद र.ह. अपनी किताब अल-इरशाद में लिखते हैं कि इमाम मूसा काज़िम अ.स. काफ़ी समय फ़ज़्ल की जेल में रहे और इस बीच हारून ने कई बार फ़ज़्ल से इमाम अ.स. को मार देने को कहा लेकिन फ़ज़्ल हर बार किसी न किसी बहाने से हारून को मना कर देता था। फ़ज़्ल ने अब्दुल्लाह क़रवी से अपनी एक मुलाक़ात में कहा भी कि मुझ से हारून ने कई बार इमाम अ.स. को मारने का दबाव बनाया लेकिन मैं किसी क़ीमत पर उसका यह काम नहीं कर सकता चाहे मुझे अपनी जान ही क्यों न देनी पड़ जाए।

फ़ज़्ल इब्ने यह्या
 
तीसरी वह जगह जहां इमाम काज़िम अ.स. को क़ैद में रखा गया वह फ़ज़्ल इब्ने यह्या का एक घर था।

इब्ने शहर आशोब में हैं कि जैसे ही इमाम काज़िम अ.स. को फ़ज़्ल के हवाले किया गया उसने तभी से इमाम अ.स. का सम्मान और अच्छे से पेश आना शुरू कर दिया था और भी कुछ लोगों ने लिखा है कि इमाम अ.स. फ़ज़्ल के घर बहुत आराम से रह रहे थे और वह इमाम अ.स. की बहुत इज़्ज़त करता था तभी यह ख़बर हारून के पास पहुंच गई उसने इस ख़बर की सच्चाई का पता लगाने के लिए अपने जासूसों को भेजा, जैसे ही जासूसों ने इस ख़बर की पुष्टी की हारून ग़ुस्से से तिलमिला गया और उसने उसी समय सिंदी इब्ने शाहिक और अब्बास इब्ने मोहम्मद को हुक्म दिया कि सौ कोड़े फ़ज़्ल को मारे जाएं।

सिंदी इब्ने शाहिक

हारून रशीद मलऊन पिछले तीनों हाकिमों के रवैये से मायूस हो चुका था इसलिए उसने इमाम अ.स. को एक नजिस और बहुत ही हिंसक स्वभाव के वहशी इंसान यहूदी सिंदी इब्ने शाहिक के हवाले किया, सिंदी हारून की हर बात आंख बंद कर के सुनने वाला ख़बीस इंसान था, यह अपने जेल में सभी क़ैदियों पर तरह तरह के ज़ुल्म करता और कभी कभी तो इमाम काज़िम अ.स. पर भी आम क़ैदियों जैसा ज़ुल्म करता, इमाम काज़िम अ.स. ने इस की जेल में बहुत तकलीफ़ें झेलीं और आपको बहुत ज़ियादा जिस्मानी और रूहानी दोनों तकलीफ़ दी गईं, इमाम अ.स. ने अपनी उम्र की आख़िरी सांस भी हथकड़ियों और बेड़ियों में गुज़ारी, हारून ने इमाम अ.स. को मानसिक तकलीफ़ देने के लिए जेल में बद किरदार औरत भेजी ताकि इमाम अ.स. का ध्यान अल्लाह की इबादत से हट कर उस औरत की ओर चला जाए लेकिन इतिहास में उस औरत का बयान दर्ज है कि उसके न केवल हर हथकंडे नाकाम हुए बल्कि वह इमाम अ.स. की इबादत से प्रभावित हो कर इमाम अ.स. के साथ जेल में ही इबादत करने लगी।

इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम की शहादत

आख़िरकार हारून रशीद ने इमाम काज़िम अ.स. को अपने रास्ते से हटाने के लिए सिंदी इब्ने शाहिक को किसी भी तरह इमाम अ.स. को ज़हर देने का हुक्म दिया, सिंदी ने हारून के हुक्म को मानते हुए इमाम अ.स. के खाने में ज़हर मिला दिया, कुछ लोगों ने लिखा है कि खजूर के दाने में ज़हर मिला कर खाने को पेश किया इमाम अ.स. ने दस खजूर के दाने खाने के बाद हाथ रोक लिया, सिंदी ने इमाम अ.स. से और खाने को कहा, इमाम अ.स. ने कहा तूने अपना काम कर दिया है और तूझे जिस काम का हुक्म दिया गया था वह तूने कर दिया अब और मुझे नहीं खाना है।

वह इमाम अ.स. को ज़हर देने के बाद 80 बुज़ुर्ग लोगों को इमाम अ.स. के पास लाया और हर एक से पूछता कि देखो मूसा इब्ने जाफ़र ए सादिक़ (अ.स) को भला मैंने कोई तकलीफ़ पहुंचाई है क्या? लेकिन इमाम अ.स. ने कहा: ऐ लोगों! जो कहा इसने वह ठीक है लेकिन मुझे ज़हर दिया गया है जिसके कारण कल मेरा चेहरा ज़हर के असर से हरा हो जाएगा और परसों मैं इस दुनिया से चला जाऊंगा। और फिर क़यामत का वह दिन भी आ गया जब इमाम मूसा काज़िम अ.स. 25 रजब (कुछ रिवायत के अनुसार 5 रजब) सन 183 हिजरी को हारून रशीद अब्बासी के हुक्म से सिंदी द्वारा दिए गए ज़हर के असर से शहीद हो गए।

इमाम अ.स. के जनाज़े को बहुत ही मज़लूमियत के साथ बग़दाद के पुल पर रख दिया गया, फिर इमाम अ.स. के चाहने वालों ने हारून रशीद के चचा सुलैमान इब्ने जाफ़र की सिफ़ारिश से उसे पुल से उठा कर मोमिनीन के बीच ले कर आए।

शैख़ क़ुम्मी र.ह. ने शैख़ सदूक़ र.ह. से रिवायत नक़्ल की है कि इमाम अ.स. के जनाज़े को शहादत के बाद हारून ने ऐसी जगह रखवाया जहां उसके हाकिम और सिपाही रहते थे और फिर चार लोगों को भेज कर पूरे शहर में ख़बर दी कि जिसे मूसा इब्ने जाफ़र ए सादिक़ (अ.स.) को देखना हो वह घर से बाहर निकल आए, उसी इलाक़े में हारून रशीद के चचा सुलैमान का घर था लोगों के शोर से वह भी घर से बाहर निकल आए जैसे ही देखा पैग़म्बरे अकरम स.अ. के बेटे के जनाज़े को किराए के मज़दूर उठाए हुए हैं तुरंत अपने सर से अम्मामा फेका, गरेबान चाक कर दिया और नंगे पांव दौड़े और ग़ुलामों को हुक्म दिया इन मज़दूरों से कहो ख़बरदार इमाम अ.स. का जनाज़ा यहीं रख दें, फिर उन्होंने आवाज़ दी कि जिसको पाक बाप के पाक बेटे का दीदार करना हो वह आए, उसके बाद चाहने वालों की भीड़ जमा हो गई और लोगों की अपने इमाम अ.स. की जुदाई में रोने की चीख़ें बुलंद हो गईं इसके बाद इमाम अ.स. को ग़ुस्ल और कफ़न देने के बाद बग़दाद (काज़मैन नामी इलाके) में दफ़्न कर दिया गया।

अस्सलामु अलैका यब्न रसूलल्लाह या इमाम मूसा इब्ने जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम व रहमतुल्लाहि व बरकातु 😭

25 Rajab ul Murajjab

Yaume Shahadat

Aaimma e Ahle Baith Ke 7we Imaam Tajdare Imamat wa Wilayat Bab ul Hawaij Aale Rasool Aulad e Mola Ali o Syyeda Batool Dilbar e Hasnain Karimain Noor e Nazar e Imaam Zainul Aabedin Jigar Gosha e Imaam Muhammad Baqar Farzand e Imaam Jafar Sadiq Hazrat Syedna Mola Imaam Musa Kazim (Alahis Salam) Bin Hazrat Syedna Mola Imaam Jafar Sadiq (Alaihis Salam)

Aapki Wiladat e Ba’Sadaat 7 Safar 128 Hijri Mutabik 6 November 745 Esvi Ko Abwa, Saudia Arabia Me Hui, Aapki Shahadat 25 Rajab ul Murajjab 183 Hijri Mutabik 1 September 799 Esvi Ko Hui, Aap Aaimma e Ahle Baith Ke 7we Imaam Hain, Aap Hazrat Syedna Mola Imaam Hussain (Alaihis Salam) Ke Shahzade Hazrat Syedna Mola Imaam Zainul Aabedin (Alaihis Salam) Ke Parpote Hazrat Syedna Mola Imaam Muhammad Baqar (Alaihis Salam) Ke Pote Hazrat Syedna Mola Imaam Jafar Sadiq (Alaihis Salam) Ke Shahzade Aur Hazrat Syedna Mola Imaam Ali Raza (Alaihis Salam) Ke Walid e Majid Hain, Khalifa Mansoor Ke Zamane Me Aap Aapne Walid e Majid Mola Imaam Jafar Sadiq (Alaihis Salam) Ki Shahadat Ke Bad 21 Saal Ki Umar Me Imaam Bane, Kuch Waqt Baad Mansoor Ne Aapko Bhi Qaid Karke Rakha, Uske Baad Mahdi Aur Musa Ne Bhi Aapko Qaid Karke Rakha, 179 Hijri 795 Esvi Me Musa Ke Bhai Haroon Rasheed Ne Aapko Qaid Kar Liya, 4 Sal Baad Uske Hukum Se Sindi Ibn Shahiq Ne Khajoor Me Zehar Milakar Aapko Shaheed Kar Diya, Aur Aapke Jism Mubarak Ko Baghdad Ke Ek Pool Par Zanjeer Ke Sath Bandhe Hue Ak Taboot Me Chor Diya, Jab Unke Taboot Ke Pas Jane Ki Koshish Karte To Unhe Haroon Rasheed Ke Log Dara Dhamka Kar Rok Dete, Ye Baat Ak Shaks Ko Pata Chali Jo Ke Ahle Baith Se Mawaddat Rakhta Tha Aur Shahi Gharane Se Tha, Khabar Sunkar Wo Us Pool Par Aaya Aur Haroon Rasheed Ke Logo Se Kehne Laga Ki Kya Tum Bhool Gye Ki Rasool e Khuda (Sallallahu Alaihi wa Aala Aalehi wa Sallam) Ne Farmaya Tha Ki Mai Ajar e Risalat Kuch Nahi Mangta Siwae Iske Ki Meri Aal Se Muhabbat Karo, Ye Sunkar Sipaahi Apne Sar Ko Jhukane Lage, Usne Kaha Jao Haroon Rasheed Se Kehdo Ki Me Bhi Shahi Khandaan Se Hu Jo Usko Karna Tha Wo Kar Chuka Ab Jo Me Chahunga Wo Karunga, Unhone Imaam Musa Kazim (Alahis Salam) Ke Janaze Ko Lekar Waha Le Aaye Jahan Quraish Ke Log Tadfeen Kiye Jaate The, Tadfeen Karne Ke Liye Unhone Hukum Diya Ki Imaam Musa Kazim (Alahis Salam) Ki Zanjeere Khol Di Jaye To Waha Mojood Sipaahi Rone Lage Aur Kaha Ki Imaam Musa Ko Aesa Zehar Diya Gya Hain Ki Inki Haddiya Gal Gayi Hain Agar Zanjeer Kholi To Inki Khaal Bhi Utar Jayegi, Itne Me Ak Ghode Par Sawaar Shaqs Aaye Aur Kehne Lage Mere Baba Ko In Zanjeero Ke Sath Hi Tadfeen Kar Diya Jaye, Jab Ye Qayamat Ke Din In Zanjeero Ke Sath Uthenge To Rasool e Khuda (Sallallahu Alaihi wa Aala Aalehi wa Sallam) Se Kahenge :- Nana! Aapki Ummat Ne Mujhe Is Tarha Ajar e Risalat Diya Hain, Us Ghode Par Sawar Shaqs Ne Imaam Ki Tadfeen Ki Aur Jab Wo Jane Lage To Logo Ne Unse Poucha Aap Kon Hain To Unhone Kaha Me Ali Ibne Musa Raza Hu, Jabki Imaam Ali Raza (Alaihis Salam) Us Waqt Madina Pak Me The, Aapka Mazar Mubarak Kazimain Sharif, Iraq Me Marjai Khaliak Hain…

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25_Rajab
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Shahadat_e_Imam_Musa_Kazimع
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Imam Musa Kazimع Ko Qaid Kiya Gaya, Bas Is Wajah Se Ki Us Waqt Ke Badshah Ki Badshahat Tou Thi, Lekin Log Aqeedat o Muhabbat Imam Musa Kazimع Or Ahlebaitع Se Rakhte The… Imam Musa Kazimع Ki Qaid Baar Baar Badalti Rahi, Kabhi Is Sheher Tou Kabhi Us Sheher… Aakhir Me Jab Us Waqt Ka Haakim, Jiska Naam Haroon Rasheed (L.a) Tha, Usko Ye Pata Chala Ki Imam Ke Zindaañ Me Rehne Ke Ba’wajood Bhi Log Unse Muhabbat Karte Hain, Unki Ek Jhalak Ke Liye Machalte Hain, Tou Unko Baghdad Ke Zindaan (Jail) Me Zeher Dilwa Diya Gaya Or Unke Jism Mubarak Ko Baghdad Ke Ek Pool Par Zanjeer Ke Sath Bandhe Huwe Ek Tab’oot Me Chhod Diya.. 
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Jab Log Unke Tab’oot Ke Pass Jaane Ki Koshish Karte Tou Use Haroon (L.a) Ke Log Dara-Dhamka Kar Rok Dete.. Ye Baat Ek Shakhs Ko Pata Chali, Jo Ke Ahlebaitع Se Mawaddat Rakhta Tha Or Shahi Gharane Se Tha… Khabar Sun’kar Wo Us Pool Par Aaya Or Haroon (L.a) Ke Logon Se Kehne Laga Ki Kya Tum Bhool Gaye Ki Rasool_e_Khuda ﷺ Ne Farmaya Tha Ki “Mai Ajr_e_Risalat Kuch Nahi Maangta Siwaa’e Iske Ki Meri Aal Se Muhabbat Karo… Ye Sun’kar Sipaahi Apne Sir Ko Jhukaane Lage… Usne Kaha Ki Ja’o Haroon (L.a) Ko Keh’do Ki Mai Bhi Shahi Khaandan Se Hu’n…, Jo Usko Karna Tha Woh Kar Chuka, Ab Jo Mai Chahunga Wo Karunga…
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Unhone Imam Musa Kazimع Ke Janaze Ko Le’kar Waha’ñ Le Aaye, Jahan Quraish Ke Log Tadfeen Kiye Jaate The… Tadfeen Karne ke Liye Unhone Hukm Diya Ki Imamع Ki Zanjeere Khol Dee Jaaye, Tou Waha Maujood Sipaahi Rone Lage Or Kaha Ki Imam Musa Kazimع Ko Aisa Zeher Diya Gaya HaiKi Inki Haddiya Gal Gayi Hain… Agar Zanjeer Kholi Tou Inki Khaal Bhi Utar Jayegi… 
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Itne Me Ek Ghode Par Sawaar Shaqs Aaya Or Kehne Laga Mere Baba Ko In Zanjeero Ke Saath Hee Tadfeen Kar Diya Jaaye, Jab Ye Qayamat Ke Din In Zanjeer Ke Saath Uthenge Tou Rasool_e_Khuda ﷺ Se Kahenge, “Nana ! Aapki Ummat Me Muje Is Tarah Ajr_e_Risalat Diya”… Us Ghode Par Sawaar Shaqs Ne Imamع Ki Tadfeen Ki Or Jab Woh Jaane Lage Tou Logo Ne Unse Puchha Aap Kaun Ho..? Tou Unhone Kaha Mai Ali ibn Musa Razaع Hu..! 
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اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى سَيِّدِنَا مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ سَيِّدِنَا مُحَمَّد 

 Kuch Bhi Khayal Hai Ke Kis Zaat Ko Imam Musa Kazim Kehte hai 珞 .
Nahi bhai Hum toh Sunni Hai yeh Sab kaha se pata honga hamein toh bas Maslak ke Narey aur Logo Ko Chidana Sikhaya Gaya hai.
illa MASHA ALLAH.
Apne Asal Ki Taraf Lauto.
Yeh Baat pehle nahi kehte the kyuke pehle Ahle Sunnat Mein Muhabbat thi Ekta Thi Magar Aj Sunniyo Mein Ikhtelaf Hogaya hai .
Ab Zaruri hai Ke Sarey Mayajal se Bachoon aur Apne Asal Ahle Bait e Paak Sahaba Ikram AwliyahAllah Sufiyah ki Taraf Palto 
Jisey Aj Samaj Nahi Aarahi hai Baat Woh Baad Mein Manega par Zaruri Manega.
Aur Maar Jaye toh AKHIRAT Mein Khud Dekh Lenga ke Jo Baat Karte woh Kya Thi.

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