3 Ramzan Wisal e Sayyidah Fatimah سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا

3 Ramzan ul Mubarak
Yaume Wisaal
Dukhat e Imaam ul Ambiya Jigar Gosha e Ummul Momineen Zoja e Mola e Kaynat Maadar e Syyed Al Shabab Al Aahlil Janna Maadar e Zainab o Kulsoom Ummul Aaimma Sayyada Nisaail Aalameen Syyeda e Kaynat Shahzadi e Konain Khatoon e Jannat Tayyaba Tahira Aabida Zahida Hazrat Syyeda Fatima Zehra (Salamun Aleha)
Aapki Wiladat 20 Jamadi us Saani Elaan e Nabuwat Se 4 Baras Pehle 605 Esvi Me Makka Sharif Me Hui, Aapka Wisaal 3 Ramzan ul Mubarak 11 Hijri 632 Esvi Ko Hua, Aap Imaam ul Ambiya Shehansha e Qull Aalam Hazrat Ahmad e Mujtuba Muhammad Mustafa (Sallallahu Alaihi wa Aala Aalehi wa Sallam) Aur Malka e Arab Mohsina e Islaam Ummul Momineen Hazrat Syyeda Khadija Tul Kubra (Salamun Aleha) Ki Shahzadi Thi, Aap Mola e Kaynat Ameer ul Momineen Mola Imaam Ali (Alaihis Salam) Ki Zoja Mohtarma Aur Ameer ul Momineen Rakib e Doshe Mustufa Mola Imaam Hasan Mujtuba Alaihis Salam) Aur Imaam e Aalimaqaam Imaam e Arsh Maqaam Hazrat Syedna Mola Imaam Hussain Badshah (Alaihis Salam) Ki Walida Majida Thi, Huzoor (Sallallahu Alaihi wa Aala Aalehi wa Sallam) Ne Aapki Shaan e Aqdas Farmaya:- Fatima Meri Jaan Ka Hissa Hain, Fatima Tamaam Jahano Ki Aurato Ki Sardar Hain, Fatima Ahle Jannat Ki Tamaam Aurato Ki Sardar Hain, Fatima Tujh Par Mere Maa – Baap Qurban, Jannat Me Sabse Pehle Dakhil Hone Wali Hasti Fatima Hogi, Meri Beti Ka Naam Fatima Islye Rakha Gaya Hai Ke Allah Tala Ne Use Aur Usse Muhabbat Rakhne Walo Ko Dozakh Se Juda Kar Diya Hain, Ummul Momineen Syyeda Ayesha Siddiqa (Salam un Aleha) Se Poucha Gaya:- Rasool Allah (Sallallahu Alaihi wa Aala Aalehi wa Sallam) Ko Logo Me Kaun Sabse Zada Mehboob Hain ? Aapne Farmaya:- Syyeda Fatima, Syyeda Ayesha Siddiqa (Salamun Aleha) Farmati Hai:- Ba’adaz Mustufa (Sallallahu Alaihi wa Aala Aalehi wa Sallam) Afzal Tareen Hasti Syyeda Fatima tuz Zehra Hain, Syyeda Ayesha Siddiqa Farmati Hain:- Aap (Sallallahu Alaihi wa Aala Aalehi wa Sallam) Ke Siwa Maine Fatima Se Zada Saccha Kaynat Me Koi Nahi Dekha, Huzoor (Sallallahu Alaihi wa Aala Aalehi wa Sallam) Ko Aurato Me Sabse Zada Mehboob Apni Shahzadi Syyeda Fatima (Salam un Aleha) Thi, Aur Mardo Me Se Sabse Zada Mehboob Mola Ali (Alaihis Salam) The, Ameer ul Momineen Hazrat Umar Farooq (Razi Allahu Tala Anhu) Ne Farmaya:- Ya Fatima! Khuda Ki Qasam Maine Aapke Siwa Kisi Shaks Ko Huzoor Nabi e Kareem (Sallallahu Alaihi wa Aala Aalehi wa Sallam) Ke Nazdik Mehboobtar Nahi Dekha, Huzoor Farooq e Azam Hazrat Umar (Razi Allahu Tala Anhu) Farmate Hai:- Ya Fatima Khuda Ki Qasam Logo Me Se Mujhe Bhi Aapke Walid e Mohtaram Ke Baad Koi Aapse Zada Mehboob Nahi, Aapka Mazar Mubarak Jannatul Baqi Sharif, Madina Pak, Saudia Arabia Me Marjai Khaliak Hain…
“Rishta-e aa’een-e haq zanjeer-e-pa ast
Paas-e-farmaan-e Janaab-e Mustafa ast”
_I am bound by the law of Islam,
I am beholden to the sayings of the Prophet ﷺ.
“Warna gird-e-turbat-ish gardeed mi
Sajda ha bar khaak-e-oo pasheed mi”
_Otherwise, I would have gone round and round her gravesite,
And I would have done sajdah on her grave.
_Dr. Allama Iqbal R.a.
3 रमजान यौम ए विशाल जनाबै फातमा ज़हरा बिन्ते
रसूल अल्लाहﷺ
तुम्हारी चौखट हैं के क़ुरान का किबलाज़हराس ,
आयतें करती हैं आकर तुम्हें सजदा ज़हराس ,
चेहरा हैदरعइबादत है ज़माना के लीये
और हैदर عकी इबादत तुम्हारा चेहरा ज़हरा س ,
तुम्हारी चौखट पे खडा है जो फकीरों की तराह
वो भी होगा कोई जन्नत का फरिस्ता ज़हरा س ,
खुद तकदीर जिनकी चोखट पर
अपनी मुकद्दर की भीख मांगे,
वो दर – ए – ज़हराس ,
की चौखट है !!
3 रमज़ान शरीफ
यौम ए शहादत
उम्मे अबीहा
(बाप की माँ)
निसाउल जन्नत
जन्नती औरतों की सरदार
सैयदा बीबी फातमा ज़हरा स.म.अ.
यह पैगाम जिंदा लोगों के लिऐ है
सुममुन बुकमुन उमयुन
अंधे बहरे गूगों और मुर्दो के लिऐ नहीं है
अगर आप जिंदा है तो अपने जिंदा होने का सबूत देते हुऐ इसे पूरा पढ़ेगें और लब्बैक या सैयदा ज़हरा कहेंगें लिखेंगें
और मौला अली अ.स.वाले जिंदा हैं और जिंदा रहेगें बेशक इसमे नसीहत है उसके लिए जो दिल रखता है या कान लगाए और मुतावज्जा हो (सूरह क़ाफ़ 37)
अल्लाह तआला के हुक्म से अल्लाह के रसूल हमारे आका स.अ. व. ने अपनी उम्मत से अजरे रिसालत मे कुछ नही माँगा सिर्फ अपने क़ुराबत की यानी अपने अहले बैत ए अतहार और उनके आल पाक स.अ.व.से मोहब्बत नहीं मोवददत करने का हुक्म फरमाया (अलशूरा 23)
माँ सैयदा बीबी फातमा ज़हरा स.म.अ.
अल्लाह के रसूल रहमतललिल आलमीन स.अ.व.की
लख़्त ए ज़िगर
उम्मुल मोमनीन
बीबी ख़दीज़ा निसाउल आलमीन स.म.अ.
की शाहबज़ादी
दिल का सुकून
आँखों की ठंडक
मौला ए काएनात मौला अली इब्न.अबू तालिब अ.स.की शरीक ए हयात बीवी साहबा
जन्नत के नौजवानो के सरदार इमाम हसन अ.स.
इमाम हुसैन अ.स.
सैयद मोहसिन अ.स.
और
सानी ए ज़हरा सैयदा बीबी जैनब स.म.अ. सैयदा बीबी कुलसूम स.म.अ.
सैयदा बीबी रुकैया स.म.अ. की अम्मी जान
जनाब अब्दुल मुत्तलिब अ.स.और बीबी फातमा स.म.अ.की पोती साहबा
जनाब इमरान इब्न अब्दुल मुत्तलिब उर्फ अबू तालिब अ.स. और सैयदा बीबी फातमा बिन्त असद स.म.अ. के घर की ज़ीनत (यानी बहु साहबा)
ख़ातून ए क़्यामत (क़्यामत की मलका )
ख़ातून ए महशर
(महशर की मलका)
ख़ातून ए जन्नत
( जन्नत की मलका )
जिसका अक़्द
मौला ए काएनात के साथ अर्शे पर अल्लाह ने पढ़ाया और फर्श पर अल्लाह के रसूल स.अ.व.ने पढ़ाया
और
जिसकी रूह ए अज़ीम खुदा ने अपने दस्त ए कुदरत से जिस्म ए अतहर से निकाली
जो
मरकज़े पंजतन
महवरे पंजतन
है
चादर ए किसा मे जब पाँच तन यानी अल्लाह के हबीब मोहम्मद मुस्तफा स.अ.व.
इमामो व तमाम वलीयों के सरदार
इमाम मौला अली अ.स.
जन्नत के सरदार
इमाम हसन व
इमाम हुसैन अ.स.
और इन सबके बीच मे बैठीं
महवर ए पंजतन सैयदा बीबी फातमा ज़हरा स.अ.व.
उस वक्त अल्लाह तआला ने फरिश्तों के सरदार जिब्राईल अ.स. के जरीए आयत भेजी
इन्नमा युरीदुल्लाहो लेयुजहेबा अंकुमुर रिजसा
अहलल बैत ए व युतहहेराकुम ततहीरा०
तर्जूमा:- अल्लाह तआला ने अहले बैत से हर किस्म की निजासत आलूदगी गुमराही वगैरह को दूर नही किया बलके इनसे बहुत दूर रखा है और
इन्हे ऐसा तैयबो ताहिर पाक किया जो उसके पाक करने का हक है
चादर ए किसा का
हजरत जिब्राईल अ.स. ने ये नूरानी मंजर देखा तो अल्लाह की बारगाह मे अर्ज़ की के इस चादर के नीचे /अंदर कौन हैं जिनकी तहारत और पाकीज़गी के ऐलान की आयत नाज़िल हुई
(अल्लाह तआला ने इनका तआरुफ अपने रसूल स.अ.व.की बजाए सैयदा बीबी फातमा ज़हरा स.म.अ.के ज़रीए से कराया )
अल्लाह तआला ने फरमाया ऐ जिब्राईल इस चादर मे बीबी फातमा ज़हरा स.म.अ. हैं और इनके बाबा मोहम्मद मुस्तफा स.अ.व. तमाम नबीयों के सरदार हैं और इनके शौहर अली इब्न अबू तालिब स.अ.व. हैं तमाम वलीयों के सरदार और इनके बेटे इमाम हसन स.अ.व. और इमाम हुसैन स.अ.व. जन्नत के नौजवानों के सरदार है
आल ए नबी
औलाद ए मौला अली
जिगर गोसा ए बतूल
जान ए हसनैन करीमैन
सुलतानुल अज़म सैयद ख़्वाजा मुईनुददीन हसन संजरी गरीब नवाज़ र.अ.
जब आप सरजमीन ए हिन्द मे तसरीफ लाए और लोगों को दीन पेश किया और लोगों ने दीन कुबूल किया और गरीब नवाज़ र.अ. ने उन्हे रोज बरोज दीन और दीन के अरकान बतलाते और समझाते थे
कुछ लोग बाहर से आए उन्हे अपने वतन जाना था और कुछ लोगों की उमर काफी थी उन्हे सफर ए आखरत की तरफ जाने की फिक्र थी
उन लोगों ने अर्ज़ किया या पीरओ मुर्शिद
ख़्वाजा गरीब नवाज़ र.अ.
हम पर करम फरमाइए
हमारे पास वक्त कम है हमे वापसी का सफर करना है
हमें दीन का मजमुआ बता दें की दीन क्या है
ख़्वाजा गरीब र.अ. ने
फरमाया
दीन अस्त हुसैन
(अस्त यानी है)
दीन आका मौला इमाम हुसैन हैं
जैसे जिसने
रसूल अल्लाह स.अ.व. को जाना पहचाना
समझा और माना
उसने अल्लाह को जाना पहचाना समझा और माना
ऐसे ही जिसने
इमाम हुसैन अ.स. को जाना पहचाना समझा और माना उसने दीन को जाना पहचाना समझा और माना
और ख्वाजा गरीब नवाज़ र.अ. ने फरमाया
दीन पनाह अस्त हुसैन
और दीन को बचाने और पनाह देने वाले भी मेरे जद इमाम हुसैन अ.स.हैं
और हर इंसान की दुनीयावी मालिक उसकी माँ होती है
(कुदरत ने उसे दूध बख्शने या ना बख्शने का अख्तियार दिया है)
मेरे जद आका मौला हुसैन अ.स.की मालिक सैयदा बीबी फातमा ज़हरा स.म.अ. हैं
अल्लाह ने कुरआन ने ऐलान किया
मालेके यौम अलदीन
छोटे काफ के नीचे ज़ेर लगा है जो मोअन्नस के लिए है
यानी ख्वाजा गरीब नवाज़ ने फरमाया
मेरे ज़द इमाम हुसैन दीन है
और उनकी वालदा सैयदा बीबी फातमा ज़हरा उनकी माँ मालेके यौम अल दीन
मैदान ए महशर मे
दीन की मालेका हैं
जिनकी ताज़ीम के लिऐ रसूल अल्लाह स.अ.व.
खड़े हो जाते और अपनी काली कमली (चादर)बिछाकर उसमे उन्हें बिठाते और आप तब तक ना बैठते जब तक सैयदा बीबी अपने दस्ते मुबारक से आपका दस्त मुबारक पकड़ कर ना बैठालतीं
रसूल अल्लाह स.अ.व.ने अपनी लख्त ए ज़िगर सैयदा बीबी फातमा ज़हरा स.म.अ.का हाथ मुबारक पकड़कर मस्जिद ए नबवी मे अपने जाँ निसार सहाबा इकराम र.अ. से फरमाया मै इसकी ताज़ीम के लिऐ अल्लाह के हुक्म से खड़ा होता हूँ क्यों कि
फातमा माँ (उम्मे अबीहा) है
इस पर मैं कुरबान
मेरे माँ बाप कुरबान
ए लोगो इससे मवददत करो मोहब्बत करो और
इसके माँ बाप यानी मुझसे और
इसके शौहर से
इसकी औलाद से मवददत और मोहब्बत करो
और
इससे मोहब्बत करने वालों से मोहब्बत करो
इसका अदब व अहतेराम करो
क्यों की ये माँ
(उम्मे अबीहा) है
इसके कदमो के नीच नीचे जन्नत है
ऐ लोगो क्यामत के बाद मैदान ए महशर मे जब मेरी लख्त ए जिगर सैयदा बीबी फातमा ज़हरा स.म.अ. की सवारी 70हजार जन्नत की हूरों की झुरमुट मे लाइ जाऐगी
जहाँ तमाम नबी
तमाम रसूल
और इमामुल आंबीया और आपकी आल पाक स.अ.व.
और
असहाबुल जन्नत
यानी जन्नती सहाबा और तमाम
वली अल्लाह व पूरी उम्मत होगी
तो निदा की जाऐगी कि
ऐ अहले महशर अपनी निगाहें निची करलो
शहजादी ए कौनैन
खातून ए महशर की सवारी आ रही है
और फिर सैयदा फातमा ज़हरा स.म.अ. को नूर की कुरशी पर बैठाया जाएगा और जन्नत को इनके कदमो के नीचे लाकर सजाया जाएगा
(ये वो हदीस ए रसूल स.अ.व. है के माँ के कदमों के नीचे जन्नत है )
अगर माँ सैयदा बीबी फातमा ज़हरा स.म.अ.समझ मे आ जाए
जिसे रसूल अल्लाह स.अ.व. ने अपनी उम्मत को समझाया है
के फातमा माँ हैं स.म.अ.
अब जो भी सैयदा बीबी फातमा ज़हरा स.म.अ. की निसबत से अपनी माँ से खुलूस दिल से मोहब्बत करेगा उनकी खिदमत करेगा उनकी फरमा बरदारी करेगा इसको दुनीया के सब रिश्तों से ऊपर रखेगा उनके नेक हुक्मो को मानेगा बुढ़ापे मे उनकी खिदमत करेगा और उनके किसी डांट डबट पर उफ भी ना करेगा
तो ऐसे लोगों के लिए उनके माँ के कदमों मे बा वसीला सैयदा फ़ातमा ज़हरा स.म.अ. के जन्नत है
ये आखरत का सौदा है जो चाहे माँ सैयदा बीबी फातमा ज़हरा स.म.अ. की निसबत कायम करके अपनी माँ के ज़रीए आखरत सवाँरकर जन्नत का हकदार बन सकता है
कुरआन की आयत कहती है (अल नज़्म) जो समझा वो समझा
कुरआन की आयत कहती है
, ला इकराहा फिददीन
दीन मे कोई जबरदस्ती नही है
और जिसे “मन “चाहता उसे अल्लाह तआला हिदायत अता फरमाता है और
जिसे “मन” चाहता है
अल्लाह तआला उसे
सिरात ए मुस्तकीम की तरफ चलाता है
और जिसे चाहता है
सिरात ए मुस्तकीम पर चलाता है
सैयदा बीबी फातमा ज़हरा स.म.अ. की बारगाह मे नजराना ए अकीदत पेश है
नूर की अंजुमन फातमा
मरकज़े पंजतन फातमा
कँहकसाँ से है ज़्यादा हसीं
तेरे घर का चमन फातमा
खुल्द की अर्श पर है दमा
छू के तेरे कदम फातमा
अर्शे आज़म से आई है तू
मुर्तुज़ा की दुल्हन फातमा
कब किसी माँ से पैदा हुऐ
हैं हुसैनो हसन फातमा
बोली जैनब से रूहे अली
सर उठा और बन फातमा
है ये कौले नबी ए सरोस
मेरा तन मेरा मन फातमा
दर ए ज़हरा पे आ के आदमी इंसान बनता है
कोई कम्बर कोई बू ज़र
कोई इंसान बनता है
अल्लाहुम्मा सल्ले अला मोहम्मदुन अली व फातमा व हसन व हसैन व आले मोहम्मद सललललाहो अलैहे व आलेही वसल्लम
तीन रमज़ान शरीफ को अपने घरों में
व इमाम बाड़ो में
व वलीयों के दरगाहों मे खानकाहों मे
माँ सैयदा बीबी फातमा ज़हरा स.म.अ. की महफिल सजाऐं
इनका ज़िक्र करें
इनकी बारगाह मे नज़्रो नियाज़ पेश करें
इनके नाम से रोज़ा इफ़तार करें कराऐं लंगर कर लोंगों को खाना खिलाऐं
इनके नाम से ज़रूरत मंद लोगों की ज़रूरतें पूरी कर खिदमते खल्क़ करें
और अपने लिए और अपनों के लिए और अपने वतन के लिए दुआऐं मागें की
ली खमसतुन उतफी बेहा
हर्रल वबा अल हातमा
अल मुस्तफा वल मुर्तज़ा
व अबना हुमा अल फातमा
मौला सैयदा बीबी फातमा ज़हरा स.म.अ.और इनके वालदैन इनकेशौहर और इनकी आलपाक स.अ.व. के सदके मे हमारे मुल्क और दुनीया के लोंगों को करोना वायरस से महफूज फरमा और हमारे मुल्क मे अमनो सुकून व सलामती अता फरमा और हुक्मरानों के दिलों में अपनी और अपने बंदों की मोहब्बत अता फरमा ताकी हर कौम को उसका हक मिले
फिर देखीए
दरे सैयदा बीबी से बंदे को क्या नही मिलता
जो मागंने ता तारीका है सलीका है उस तरह मागों
दर ए फातमा ज़हरा स.म.अ. है जिस दर की सफाई अपनी दाढ़ी और सर के बालों से साफ करने वाले जनाब सलमान फारसी अ.स. को अल्लाह के रसूल स.अ.व..ने फरमाया सलमान भी मेरे अहले बैत के घर वालों मे से है
और जिसके घर की कनीज़ जनाब बीबी फ़िज़्ज़ा स.म.अ.
जो हब्सा के बादशाह की बेटी और जिनके सर मे बादशाहत का ताज सजने वाला था उसे ठोकर मारकर
सैयदा बीबी फातमा ज़हरा स.म.अ. की गुलामी को पसंद फरमाया वो सैयदा बीबी की चौखठ मे आने वाले हर सवाली का जवाब.कुरआन की आयत से देतीं थीं
जिसकी कनीज़ का ये आलम है उसकी मलका का आलम क्या होगा
और आप मौला इमाम हुसैन अ.स.के साथ करबला मोअल्ला मे साथ थीं
और असीराने करबला यानी सानी ए ज़हरा सैयदा बीबी जैनब स.अ.म.के साथ साथ थीं
नोटः-हर साल के मुताबिक 3 रमज़ान शरीफ को बाद नमाज़ असर
जनाब सैयदा बीबी फातमा ज़हरा सलाम अल्लाह अलैहा की बारगाह मे नज़्रो नियाज़ पेश की जाऐगी और औरतों के रोज़ा इफ़तार का प्रोग्राम मुल्क मे फैला करोना वायरस की वजह से इस साल भी नही होगा
जिसने अज़म/ हिन्द मे दीन का पैगाम दिया फैलाया उसी नाएबे नबी अताए रसूल ख्वाजा गरीब नवाज़ र.अ. की निसबत और पीरोमुर्शिद आले मौला अली और खादिम ए ख्वाजा गरीब नवाज र.अ. सैयद फखरुददीन उर्फ पीर फखरू मियां चिश्ती साबरी फखरी अजमेरी र.अ.के दिए इल्म ए पंजतनी और
सैयद फ़रीद मियां चिश्ती साबरी
सैयद क़म्बर मियां चिश्ती साबरी हुजरा नं. 6 दरबार शरीफ अजमेर की निसबत से ये पैगाम देने की कोशिस कर रहा हूँ
अल्लाह के रसूल स.अ.व. का फरमान है जो अपने लिऐ पसंद फरमाओ उसे अपनो के लिऐ भी पसंद फरमाओ
आप भी इस कौले रसूल स.अ.व. पर अमल करके अपनो के पास इस पैगाम को अपनो तक पहूँचा सकते हैं
अगर अच्छा लगे आपका दिल कहे
मिन जानिब
3 रमज़ान योमे विसाल हज़रात फ़ातिमा बिन्ते रसूलल्लाह
हज़रात फातिमा बिन्ते रसूलल्लाह की रूह ए मुबारक को खुद अल्लाह तआला ने क़ब्ज़ फ़रमाया है
(तफ़सीर ए रुहूल बयान जिल्द नं 3 साफ़ नं 403)
अल्लाह हुमा सल्लेअल्लाह सैय्यदना व मौलाना मोहम्मदीन
व आलेही मोहम्मदीन बारीक़ व सल्लीम
Afdalul Bashar Ba’adaz Ambiya, Khairun Nisa, Sayyedatun Nisa, Raza-e-Khuda, Lakhte Jigar-e-Mustafa, Qalb-e-Mustafa, Jaan-e-Mustafa, Ummul Hasnain, Malika-e-Kaunain, Ummu Abeeha, Khatoon-e-Jannat Hazrat Sayyeda Fatimah tuz Zahra Salamullahi Alaiha Salawatullahi Alaiha wa Ala Abeeha wa Ummiha wa Ba’aleeha wa Aaliha 3 Ramzan Youm-e-Wisaal hai.
Aaqa SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne Unhe Apne Wisaal ke karib hone ki Khabar di to Aap Rone lag gayin, fir Aaqa SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne Unhe Basharat di ke Mere Baad Meri Ahle Bayt me se Tum sabse pehle Mujhse Milogi, Ye Sunna tha ke Aap Muskura Padin!
Aulia Allah ka Mamul hai ke Aaqa SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ki Bargah-e-Aqdas sw kuch mangna ho to pehle Sayyeda-e-Kainat Salamullahi Alaiha Ki Bargah-e-Aqdas me Arz karte kyu?
kyunki
Syeda Zahra ko Ata Hui Wo Shaan-e-Aala,
Samjhega Usey koiiii Muqaddar waala,
Ummide Sifarash Unse Rakhta hai Naseer,
Arey Zahra ka Kaha na Mustafa ne Taala ❤
Jitna hosake Aapki Bargah me Khiraj-e-Aqeedat Pesh karen
Salamullahi Alaiha wa Ala Abeeha wa Ummiha wa Ba’aleeha wa Aaliha

3 Ramzan Yaum-e-Wisal Khatun-e-
Jannat Hazrat Bibi Fatima RaziAllahu
Anha!
Ummul Momenin Hazrat Bibi Khadija
RaziAllahu Anha Ki Aakhri Nishani
Hazrat Khatun-e- Jannat Bibi Fatima
RaziAllaha Anha Hain! Aap 20
Jamadissani Ko Elan-e-Nubuwat Se 5
Saal Pahle Makka Mein Paida Hui!
Aap Tamam Jannati Aurto Ki Sardar
Hain.
Allah Ke Rasool Sallallahu Alayhi
Wassallam Jab Hijarat Farma Kar
Madina Tashrif Laye, Us Wakt Aap
Kuwari Thi! Moharram 2 Hijri Mein
Hujur Ne Apni Chaheti Beti Ka Nikah
Hazrat Ali Sher-e-Khuda RaziAllahu
Anha Ke Sath Kar Diya! Dono Ko Apne
Ghar Se Wida Farmane Ke Baad Aap
Ne Farmaya Ghar Pahuch Kar Tum
Dono Mera Intezar Karna! Thodi Der Ke
Baad Aap Beti Ke Ghar Pahuche, Waju
Ke Liye Pani Talab Farmaya! Waju
Farma Lene Ke Baad Bacha Pani Aap Ne
Beti Aur Damad Pr Chidak Kar Yuh
Dua Farmayi- Allhumma Barik Fihima,
Wa Barik Alaihima Wa Barik Lahuma
Fi Naslehima.
(Ay Allah! In Dono Me Barkat Ata
Farma, In Par Apni Barkate Nazil
Farma Aur Inki Nasl Me Barkat De)
Rukhsati Ke Wakt Allah Ke Rasool Ne
Apni Beti Ko Tohfe Ke Taur Par 1
Takht, 1 Takiya Jiske Andar Khajur Ki
Chal Bhari Hui Thi, 1 Pyala, 1
Mashak, 2 Chakiya, 2 Ghare Diye The!
Allah Ke Rasool Sallallahu Alayhi
Wassallam Ko Apni Beti Ne Badi
Mohbbat Ki, Aap Farmaya Karte- Fatima
Mere Badan Ka Ek Tukda Hai, Jisne Use
Taklif Pahuchayi Usne Mujhe
Taklif Pahuchayi, Jisne Use Naraj Kiya
Usne Mujhe Naraj Kiya!
Hazrat Jamia Bin Aumer Farmate Hai-
Main Apni Fufi Ke Sath Ek Baar
Hazrat Bibi Aaisha Ki Khidmat Me Gaya!
Mene Ummul Momenin Se Pucha-
Allah Ke Rasool Sabse Jyada Kisse
Mohbbat Karte?
Unhone Jawab Diya- Hazrat Bibi Fatima
RaziAllahu Anha Se!
Mohabbat Ka Hi Takaja Tha Ki Aap Jab
Bhi Bahar Se Tashrif Late To
Sabse Pahle Masjid-e-Nabwi Mein 2
Rakat Namaj Ada Farmate, Phir Hazrat
Bibi Fatima RaziAllahu Anha Ke Ghar
Tashrif Le Jate, Uske Baad
Ummhatul Momenin Se Mulakat Ke Liye
Jate! Yahi Wajah Ke Taur-Tarike
Chal Dhal Me Wahi Hazrat Rasul-e-
Akram Sallallahu Alayhi Wassallam
Jaisi Thi! Hazrat Bibi Fatima RaziAllahu
Anha Jab Bhi Aap Ke Pas Aati
To Mohbbat Ke Mare Aap Khade Ho Jate
Hai Aur Unhe Apne Pas Bitha Lete!
Aap Ki Gharelu Zindagi Badi Tangi Se
Gujarti Thi! Aap Ghar Ke Sare
Kaam-Kaaj Khud Kiya Karti, Bacho Ki
Parwarish, Shohar Ki Khidmat Aur
Allah Ki Ibadat Aap Ke Rojana Ke Mamul
The! Raat Ko Ghar Ke Kaam-Kaaj
Se Farig Hokar Jab Aap Ibadat Ke Liye
Khadi Hoti To Kabhi-Kabhi Aisa
Hota Ki Ek Hi Sajde Mein Fajar Ki Azan
Ka Wakt Ho Jaya Karta!
Aap Ki Mehnat Aur Taklif Ko Dekh Kar
Ek Din Hazrat Ali RaziAllahu Anha
Ne Aap Se Farmaya- In Dino Darbar-e-
Rasool Sallallahu Alayhi Wassallam
Mein Mal-e-Ganimat Ke Sath Bahut Se
Kedi Bhi Aaye Hai! Tum Sarkar Ke
Pas Jao Aur Ek Khadim Apne Liye Bhi
Mang Lao Taki Mehnat Mashakkat Kam
Ho Jaye! Aap Shohar Ka Hukm Tal Na
Saki, Chali To Gayi Lekin Sharm Ke
Mare Kuch Na Kah Saki! Salam Karke
Wapas Chali Aayi! Phir Dono
Darbar-e-Rasool Sallallahu Alayhi
Wassallam Mein Hazir Huve Aur Apni
Apni Taklif Bayan Ki! Aap Ne Un Dono
Ke Halat Sunkar Farmaya- Beti!
Abhi Main Tumhe Koi Khadim Nahi De
Sakta, Abhi Mujhe Suffa Walo Ke
Khane Pine Ka Intezam Karna Hai, Wo
Sabhi Bhuke Hai! Miya-Biwa Dono
Wapas Apne Ghar Chale Gaye! Kuch Der
Baad Allah Ke Rasool Sallallahu
Alayhi Wassallam Khud Unke Pas
Tashrif Le Gaye Aur Farmaya- Tum
Dono
Mujh Se Jo Chiz Mangne Aaye The, Main
Usse Badiya Chiz Tumhe Dene Aaya
Hoon!
Suno- Har Namaj Ke Baad 10-10 Baar
SubhanAllah, Alhamdulilah Aur
AllahuAkber Para Karo Aur Sote Wakt
33 Baar SubhanAllah, 33 Baar
Alhamdulilah Aur 33 Baar AllahuAkber
Pad Kar Apne Uper Dam Kar Liya
Karo!
Hazrat Rasul-e-Khuda Sallallahu
Alayhi Wassallam Ke Parda Farmane Ke
Baad Aap Judai Ka Gam Bardasht Na Kar
Saki Aur 6 Mahine Baad Hi 29
Saal Ki Umr Mein 3 Ramzan 11 Hijri Ko
Madina Sharif Mein Inteqal Farma
Gayi! Aap Ki Wasiyat Ke Mutabik Aap Ko
Raat Mein Hi Jannatul Baki Mein
Dafn Kar Diya Gaya!

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