रसुलल्लाह ﷺ और ग़म ऐ हुसैन عليه السلامअेहले सुन्नत की क़ुतुब में

रसुलल्लाह ﷺ और ग़म ऐ हुसैन عليه السلامअेहले सुन्नत की क़ुतुब में

1) फ़ज़ाइल उस सहाबा – 1357
इमाम अहमद बिन हंबल ने नक़ल किया है की हुजुर ﷺ ने हज़रत उम्मे सलमा स.अ. से फ़रमाया “अभी घर में मेरे पास एक फरिश्ता आया जो पहले कभी नहीं आया, उसने मुझ से कहा आप का ये बेटा शहीद किया जायेगा, अगर आप चाहे तो मैं उस ज़मीन की मिट्टी आप के पास ले आऊ जिसमे वो शहीद होगा फिर उसने मेरे सामने मिट्टी निकाली”
-इस किताब के मुहक्किक वसीउल्लाह बिन मुहम्मद अब्बास इस रिवायत को सही कहते है। इसे इमाम तबरानी ने और इमाम अहमद ने रिवायत किया है।

2) फ़ज़ाइल उस सहाबा – 1380, 1381, 1389
इब्ने अब्बास फरमाते है की “मैंने निस्फुननहार के वक़्त नबीﷺ को ख्वाब में देखा, आपﷺ परागन्दा हाल व परगंदा बाल थे, और आप ﷺ के पास एक शीशी थी, जिस में खून था, आप ﷺ इसे उलट पुलट रहे थे या उसमे कोई चीज़ तलाश कर रहे थे। मैंने अर्ज़ किया या रसुलल्लाह ﷺ ये क्या है ? आप ﷺ ने फ़रमाया हुसैन के साथियो का खून है, मैं इसे सुबह से इकठा कर रहा हु।”
हज़रत अम्मार कहते है की हमने ज़हन में रखकर अंदाज़ा लगाया तो ये वही दिन था जिसमे हज़रत हुसैन अस को शहीद किया गया
-किताब के मुहक़्क़िक़ के मुताबिक इसकी सनद सही है।
-इमाम हाकिम ने इसे मुस्लिम की शर्त पे सही करार दिया है।
-इमाम अहमद ने मुसनद (जिल्द 1, सफा 648) और हाकिम ने मुस्तदरक (जिल्द 4, सफा 397), इमाम अब्दुल बर ने अल इस्तियाब (जिल्द 1, सफा 38) में और ज़हबी ने “सियार” में (जिल्द 4, सफा 152) में नक़ल किया है।

3) फ़ज़ाइल उस सहाबा – 1391
हज़रत उम्मे सलमा स.अ. फरमाती है “हज़रत जिब्राइल ने हुजूरﷺ को कहा आप की उम्मत इसे (इमाम हुसैन अस) क़त्ल करेगी और आप चाहे तो मैं उस सरज़मीन की मिट्टी आप को दिखा दु, फिर उन्हों ने आप को वो मिट्टी दिखायी तो वो करबला की मिट्टी थीं।”
-किताब के मुहक़्क़िक़ के मुताबिक इसकी सनद सही है
-ऐसी ही रिवायत मुसनद अबू याला मौसिली (647, 3402) में है जिसे इस किताब के मुहक़्क़िक़ हुसैन सलीम असद सहीह हसन कहते है।

4) मुसनद अहमद बिन हम्बल 648
जब मौला अली अ.स. सिफ़्फ़ीन के वक़्त नैनवा पहोचे तो कहा “अय अबु अब्दुल्लाह (इमाम हुसैन अस की कुन्नियत है), फुरात के किनारे सब्र करना”
रावी ने जब पुछा की क्या हुवा अमीर उल मोमिनीन तो उन्हों ने फ़रमाया एक दिन में रसूलल्लाह के पास हाजिर हुवा तो क्या देखता हु की आप की आखो से आँसू रवा थे तो मैंने पूछा तो आप ﷺ ने फ़रमाया “अभी जिब्राइल ने वो मिट्टी दी है जहा फुरात के किनारे हुसैन शहीद किया जायेगा तो मैं अपने आंसू न रोक सका।”

5) मुसनद अहमद बिन हम्बल 2165
इब्ने अब्बास रिवायत करते है की एक दिन मैंने दोपहर के वक़्त रसुलल्लाह ﷺ की ख्वाब में ज़ियारत की तो आप ﷺ इस हाल में थे की आप ﷺ के बाल बिखरे हुवे थे, और आप ﷺ पर गर्द लगी हुवी थी, और आप ﷺ के पास एक शीशी है, जिसमे खून है। मैंने (इब्न अब्बास ने) अर्ज़ किया “या रसुलल्लाह ﷺ ! ये क्या माजरा है ?”
रसूलल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया “ये हुसैन और उसके साथियो का खून है जिसे मैं आज सुबह से एकठा कर रहा हूँ”
अम्मार ताबई का बयान है की हमने तस्दीक कर ली तो वो दिन १० मुहर्रम 61 हिजरी का दिन था।

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