
Hadith Does wealth decrease by charity???





Islamic history ki sabse pehli jang (War of Defence) 17 Ramzan ko Badr ke maidan me hui jisko Jang-e-Badr ke naam se yaad kiya jata hai.

313 jaanisar Sahaba-e-Kiram ne Maah e Ramzan me Arab ki garmi me roze ki haalat me jang ka dhang ka saaman na hote hue bhi badi shujaat ke saat Islam ke dushmano ka jo musalmano ko maarne ki niyat se aa rahe they; muqabla kiya aur Allah Ta’ala Musalmano ko fatah ata faramayi!

In 313 Sahaba-e-Kiram ko is jaanisari ka ye badla mila ke Badr ke Hero Sayyeduna Maula Ali Alaihissalam se marvi hai ke Aaqa SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne Ashab-e-Badr ke liye farmaya:

Allah Ta’ala ne Ahle Badr ki taraf tawajjoh farmayi aur farmaya:
TUM JO AMAL KARNA CHAHTE HO KARO BESHAQ TUMHARE LIYE JANNAT LAAZIM HOGAYI,
ya farmaya –
MAINE TUMHE MAAF KAR DIYA …
Bukhari, 4/1463, #3762
Muslim, 4/1941, #2494
An Najabat Fee Manaqibis Sahabati wal Qarabat RadiAllahu Anhum.
Yaani Un 313 Sahaba-e-Kiram ko life time guarantee dedi gayi ke jo karna hai karo Tum Jannat me he jaoge !!! (SubhanAllah)
Jang e Badr me jahan par Rasool e Pak ﷺ ka khema (tent) tha ab wahan par ek masjid ki tameer ki gayi hai jise masjidareesh kehte hai.
Jung e Badr ke maidan ke bahar ek choti si deewar banayee gayi hai jis par us Jung me hissa lene wale 14 sahaba ke naam likhe hue hai jo us jung me Shaheed hue the.
Un 14 Sahaba me 6 Muhajiroon sahaba aur 8 Ansar sahaba the unke naam ye hai,
1) Umayr bin Abi Waqqas (رضي الله عنه)
2) Safwan bin Wahb (رضي الله عنه)
3) Zish Shamalain ibn ‘Abdi ‘Amr (رضي الله عنه)
4) Mihja’ bin Salih (رضي الله عنه)
5) Aaqil bin al-Bukayr (رضي الله عنه)
6) Ubayda bin al-Harith (رضي الله عنه)
7) Sa’d bin Khaythama (رضي الله عنه)
8) Mubashshir bin ‘Abdi’l Mundhir (رضي الله عنه)
9) Haritha bin Suraqa (رضي الله عنه)
10) Rafi’ bin al-Mu’alla (رضي الله عنه)
11) Umayr bin al-Humam (رضي الله عنه)
12) Yazid bin al-Harith (رضي الله عنه)
13) Mu’awwidh bin al-Harith (رضي الله عنه)
14) Awf bin al-Harith (رضي الله عنه)
Aulia kehte hain ke jisko koi bhi taklif ya pareshani ho aur wo In 313 Muqaddas Hastiyo ke Naam ki Tilawat karke Allah Ta’ala se Unke Waseele se Dua kare to uski jo bhi pareshani ho wo dur ho jati hai!









17 Ramzan fateha e badr
Jung e Badr Aur Maula Ali ع 💚
Jung e Badr Me, Jis Waqt Mushriko’n Ke
Lashkar Se Atba, Sheba, Or Waleed Jaise
Pehelwaan Maidan Me Aa Kar, ISLAM Ke
Sipahi’on Ko Lalkara Tou Us Waqt Huzoor
Muhammad ﷺ Ke Hukm Se Hazrat Ubeda
Bin Haris ر , Hamza Bin Abdul Mutalib ع Or
Hazrat Ali Ibn Abi Talib ع , Unse Jang Karne
Ke Liye Maidan Me Aaye…
_
Hazrat Ubeda ر , Atba Ke Mukaabil..,
Hazrat Hamza ع, Sheba Ke Mukaabil..,
Or Hazrat ALI ع , Waleed Se Lardney Ke
Liye Tayyar Huye.. Morikheen Ne Bayañ
Kiya Hai Ke, Hazrat ALI ع Ne Apne
Dushman Waleed Ko Pehle Hee
Waar Me Qatal Kar’diya Tha…
Uske Baad, Wo Hazrat Hamza ع Ki
Madad Ke Liye Aaye, Or Sheba Ko Bhi
Talwar Se Do Tukre Kar Diye… Uske
Baad Hazrat Ali ع Or Hazrat Hamza ع ,
Hazrat Ubeda ر Ki Madad Ke Liye Gaye
Or Atba Ko Bhi Qatal Kar Diya…
_
Is Tarah Hazrat ALI ع , Mushrik’on Ke
Lashkar Ke 3no Pehlwanon Ke Qatal Me
Shareek Thay.., Isliye Jab Hazrat Ali ع Ne
Muwaviya Ko Khat Likha Tou Us’me
AAP ع Ne Ye Likha :: 👇👇👇👇👇
“Wo Talwar Jis’se Maine Ek Hee Din Me
Tumhare Dada (Atba), Tumhare Mama
(Waleed) Or Tumhare Bhai (Hanzala) Or
Tumhare Chacha (Sheba) Ko Qatal Kiya,
Wo Aaj Bhi Mere Pass Hai.”
_
Morikheen Ne Likha Hai ke, Jang e Badar
Me Dushman’on Ke 70 Sipahi Maarey Gaye,
Jis’me Aboo Jahal, Umeya Bin Khalf, Nazar
Bin Haris Or Dosre Kaafi Kafir’on ke Sardar
Shaamil Thay, Jis’me 35 Ko Hazrat ALI ع
Ki Talwar Se Wasael Jahannum Huye..
Uske Elawa Dosro’n Ke Qatal Me Bhi
Imam Ja’far Muhammad Bin Baaqir ع Se
Marwi Hai Ki Aap Farmate They ki,
Badr Ke Roz, Ek Firishte Ne Jis Ka Naam
‘Rizwan’ Tha Aasmaan Se Pukaar Kar Kaha :
La Fata Illa Ali La Sayf Illa Zulfiqar !
👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇
Nahi’n Ali ع Ke Siwa Koi Bahaadur, Aur
Nahi’n Zulfiqar Ke Siwa Koi Talwar !
_
Reference :
_
[Arjah-ul-Matalib Fi Sirat

जंग ए बदर में जिस वक्त मुशरिकों के
लश्कर से अतबा शेबा ओर वालिद जेसे
पेहलवान मेदान में आकर इस्लाम के सिपाहियों को ललकारा तों उस वक्त हुजूर मुहम्मद ﷺ के हुक्म से उबेदा
बीन हारिस ر , हम्ज़ा बीन अब्दुल मुतालिब ع ओर हज़रत अली इब्ने अबी तालिबع उनसे जंग करने
के लिए मेदान में आये …
_
हज़रत उबेदा ر , अतबा के मुक़ाबिल..,
हज़रत हम्ज़ा ۴, शेबा के मुक़ाबिल ..,
ओर हज़रत अली ۴ , वलिद से लडने के लिए तेयार हुए .. मोरीख ने बयान किया है के हजरत अली ۴ ने अपने
दुश्मन वलिद को पेहले ही वार में कत्ल कर दिया था ..
उनके बाद वो हज़रत हम्ज़ा ۴ की मदद के लिए आये ओर शेबा को भी तलवार से दो तुकडे कर दिया … उसके बाद हज़रत अली۴ ओर हज़रत हम्ज़ा ۴ ,
हजरत उबेदा ر की मदद के लिए गये
ओर अतबा को भी कत्ल कर दिया …
_
इस तरह हज़रत अली ۴, मुशरीकों के
लश्कर के तीनों पेहलवानों के कत्ल में
शरीक थे.., इस लिए जब हज़रत अली ۴ ने
मुवावीया को ख़त लिखा तो उसमें
आक ۴ ने ये लिखा :: 👇👇👇👇👇
“वो तलवार जिससे मेने एक ही दिन में तुम्हारे दादा (अतबा), तुम्हारे मामा
(वलीद) ओर तुम्हारे भाई (हनजला) ओर
तुम्हारे चाचा (शेबा) को कत्ल किया वो आज भी मेरे पास है.”
_
मोरीखींन ने लिखा के जंग ए बदर
में दुश्मनों के70सिपाही मारे गए जिसमें अबू जहल उमेया बीन खल्फ नजर
बीन हारिस ओर दुसरे काफी काफीरों के सरदार सामिल थे जिसमें 35को हज़रत अली ۴
की तलवार से वासिल जहन्नुम हूए ..
उसके इलावा दुसरो के कत्ल में भी
इमाम जाफर मुहम्मद बाकिर۴ से
मरवी है कि आप फरमाते थे कि ,
बदर के रोज़ एक फरीस्ते ने जिसका नाम
‘रिजवान’ था आसमान से पूकार कर कहा :
ला फता इल्लाअली ला शैफ इल्ला जुल्फिकार !
👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇
नहीं है अली ۴ के सिवा कोई बहादुर और नहीं जुल्फिकार के सिवा कोई तलवार !
_
Reference :
_
[Arjah-ul-Matalib Fi Sirat
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى سَيِّدِنَا مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ سَيِّدِنَا مُحَمَّد ❤

📜☞ जंगे बद्र में कुल 14 मुसलमान शहादत से सरफ़राज़ हुए जिन में से 6 मुहाजिर और 8 अन्सार थे।
✪➧ शोहदाए मुहाजिरिन के नाम ये है ★↷
01 ✪ ► हज़रते उबैदा बिन अल हारिष
02 ✪ ► हज़रते उमैर बिन अबी वक़्क़ास
03 ✪ ► हज़रते जुशशिमालैन बिन अब्दे अम्र
04 ✪ ► हज़रते आकिल बिन अबू बुकैर
05 ✪ ► हज़रते महजअ
06 ✪ ► हज़रते सफ्वान बिन बैज़ा
✪ ► अन्सार के नामो की फेहरिस्त ये है ★↷
07 ✪ ► हज़रते साद बिन खैषमा
08 ✪ ► हज़रते मुबशशिर बिन अब्दुल मुन्ज़िर
09 ✪ ► हज़रते हारिषा बिन सुरक़ा
10 ✪ ► हज़रते मुअव्वज़ बिन अफराअ
11 ✪ ► हज़रते उमैर बिन हमाम
12 ✪ ► हज़रते राफेअ बिन मुअल्ला
13 ✪ ► हज़रते औफ़ बिन अफ़रा
14 ✪ ► हज़रते यज़ीद बिन हारिष।
✪➧ इन शुहदाए बद्र में से 13 हज़रात तो मैदाने बद्र ही में मदफन हुए मगर हज़रते उबैदा बिन हारिष ﺭﺿﻲ ﺍﻟﻠﻪ ﺗﻌﺎﻟﻲ ﻋﻨﻪ बद्र से वापसी पर मंज़िले सफराअ में वफ़ात पाई इसलिये इनकी क़ब्र मंज़िले सफराअ में है..✍
📬 सिरते मुस्तफा, सफ़ह 233, जुर्कानी, जिल्द-01, सफहा-444,445
17 रमज़ान इस्लाम की पहली जंग फ़तह ग़ज़वा-ए-बदर आप तमाम मोमिनो को बहुत बहुत मुबारक़ हो!
हुज़ूर पुरनूर नबी ए करीम सल्ललाहो अलेहे वसल्लम अपने 313 सहाबा ए किराम अज़मइन के साथ सन् 2 हिजरी में मदीने शरीफ से बदर के मुक़ाम तक पहुंचे जहा कुफ्फार के साथ जंग ए बदर का मशहूर वाकया रुनुमा हुआ |
जब आप लोग बदर के मुक़ाम पे पहुंचे तो रात हो चुकी थी उस वक़्त अरब के क़ाइम कर्दा अक़ाइद के तहत ये तय पाया गया की जंग सुबह होगी लिहाज़ा रात भर आराम किया जाये, लिहाज़ा एक तरफ मुसलमानो के लश्कर ने पड़ाव डाला जबकि दूसरी ज़ानिब कुफ्फार अपने लश्कर के साथ ठहरे, हालांकि अगर पता हो की सुबह जंग होने वाली हे तो मारे खौफ के कहा नींद आँखों में आएगी सहाबा ए इकराम रज़ियल्लाहो अन्हो तो शहादत पाने की ख़ुशी में और ज़ज़्बा ए इमानी से सरशार वेसे भी न सो सके की सुबह न जाने किसकी किस्मत में जाम ए शहादत नोश करना लिखा हो मगर अल्लाह त’आला की क़ुदरत ए कामला के उस ज़ात ए पाक ने तमाम इस्लामी लश्कर को सुकून की नींद मुहैया की कि इससे पहले सहाबा ए इकराम कभी ऐसी पुरसुकून नींद न सोये थे !!
उधर कुफ्फार को अल्लाह करीम की क़ुदरत ए कामला से रात भर एक खौफ तारी कर दिया गया जिससे उनको सारी रात नींद न आयी, एक और चीज़ कि अल्लाह ने मुसलमानो के दिलों में कुफ्फार के लश्कर को इंतेहाई कम कर दिया जबकि कुफ्फार के दिलों में ये खौफ डाल दिया जैसे वो 313 न हो बल्कि 1000 हो, सुबह हुई हुज़ूर नबी ए करीम सल्ललाहो अलेहे वसल्लम की इक्तिदा में सब सहाबा ए इकराम अज़मइन रज़ियल्लाहो अन्हो ने नमाज़ ए फ़ज्र अदा की और नमाज़ अदा करते ही नबी ए करीम सल्ललाहो अलेहे वसल्लम ने सब से कहा के अगर ऐसा हो जाये अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की ज़ानिब से 1000 फ़रिश्ते तुम्हे जंग में साथ दे तो कैसा हो, तो सहाबा ए इकराम अज़मइन रज़ियल्लाहो अन्हो मारे ख़ुशी के झूम उठे फिर फरमाया की 3000 आ जाये तो फिर तमाम सहाबा रज़ियल्लाहो अन्हो और खुशी से झूम गए फिर आखरी में फ़रमाया की अगर 5000 फ़रिश्ते आ जाये तो कैसा हो तो तमाम सहाबा ए इकराम रज़ियल्लाहो अन्हो बहुत खुश हुवे और कहने लगे कि अगर ऐसा हुआ तो हम कुफ्फार पर बड़ी आसानी से ग़ल्बा पा जायेगे
क़ुर्बान जाए सरकार ए दो आलम सल्ललाहो अलेहे वसल्लम पर कि उस वक़्त अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने भेजने का इरादा नहीं फरमाया था मगर जब हुज़ूर नबी ए करीम सल्ललाहो अलेहे वसल्लम ने फ़रमा दिया तो अल्लाह करीम ने अपने हबीब सल्ललाहो अलेहे वसल्लम के लिए फरिश्तों की फ़ौज़ भेज दी !
(सुब्हान अल्लाह क्या इख़्तियार अता किया हे अल्लाह ने हमारे आक़ा सल्ललाहो अलेहे वसल्लम को)
तो जब जंग शुरू हुई तो अल्लाह करीम ने फरिश्तों को हुक्म दिया के जाओ और असहाब ए बदर के साथ जंग में कुफ्फार से लड़ो और ऐसे जाना की तुम्हारे हाथो में तीर और तलवार हो जंगी लिबास में जाना
तो हुक़्मे बारी ताला पाते ही फरिश्तों की जमात सरदार ए मलाइका हज़रत ज़िब्रिल अलेहहिस्सलाम की कियादत में असहाब ए बदर के साथ कुफ्फार से जंग करने आ गए और ये जंग मुसलमानो ने फरिश्तों की गैबी मदद से बा आसानी जीत ली, बहुत से कुफ्फार के सरदार इस जंग में मारे गए जिससे उ की कमर टूट गयी और बहुत से कुफ्फार को कैदी बना लिया गया तो नबी ए करीम सल्ललाहो अलेहे वसल्लम ने सहाबा ए इकराम रज़ियल्लाहो अन्हो से पूछा कि क्या किया जाए इनके साथ। तो सबने अपनी अपनी राय दी के ईसको क़त्ल कर दिया जाए, या इनको कैदी बनाकर गुलाम बना लिया जाये मगर क़ुर्बान जाए आक़ा ए दो जहा सल्ललाहो अलेहे वसल्लम पर के अल्लाह करीम ने बेशक आप को रहमतुललिल आलमीन बनाकर भेजा तो आपने ये फैसला किया की उन से फायदा लेकर छोड़ दिया जाए
क्या बात हे सरकारे दो आलम सल्ललाहो अलेहे वसल्लम की के लोग उनको मारने की गरज से आते और आप अपनी रहमत ए बा करम के सदके उनको छोड़ देते
फ़रिश्ते भी वापस चले गए जंग के बाद आपने नमाज पढ़ाई ..!!
जब आप नमाज से फारिग हुए तो एक सहाबी ने अर्ज़ किया कि या रसूलल्लाह सल्ललाहो अलेहे वसल्लम आप नमाज के दौरान मुस्कुरा क्यों रहे थे तो आक़ा सलल्लाहो अलेहे वसल्लम ने मुस्कुरा कर जवाब दिया की
जिब्रील ए अमीन अलैहिस्सलाम जंग के बाद तमाम फरिश्तों को लेकर वापस चले गए तो अल्लाह के हुक्म से आसमान पर फरिश्तों ने उन्हें आने से रोक दिया और फ़रमाया की तुम जिस मक़सद के लिए गए थे उसके बिना कैसे आ गए …??
तो जिब्रील अलैहिस्सलाम ने फरमाया की हम तो जंग में सहाबा की मदद करने के किये गए थे तो उन्होंने फ़रमाया नहीं तुम को रज़ा ए मुस्तुफा सल्ललाहो अलेहे वस्सल्लम की खातिर भेज गया था लिहाज़ा जाओ और जब तक उनसे इज़ाज़त न ले लो वापस न आना ..!
तो इस वजह से जिब्रील अलैहिस्सलाम मेरे पास आये थे और उस वक़्त हम नमाज अदा कर रहे थे तो मैं नमाज में बोल नहीं सकता था इसलिए मुस्कुरा कर उन्हें इज़ाज़त दी की हा अब तुम सभी जा सकते हो .. |
सुब्हान अल्लाह क्या मुक़ाम हे हमारे आक़ा हज़रत मोहम्मद सल्ललाहो अलेहे वसल्लम का….
•••••• सोचिए ••••••
जंगे बद्र में सिर्फ़ 313 अफ़राद, 70 ऊंट, 3 घोड़े, 8 तलवारे और 6 ज़िरह थी।
जबकि लश्करे कुफ़्फ़ार के पास 1000 अफ़राद, 700 ऊंट, 100 घोड़े, 950 तलवारे और 950 ज़िरह थी ।
एक नज़र जंगे बद्र पर डालिए और अपने वजूद पर ग़ौर व फ़िक्र करिये कि आज हमारे पास किस चीज़ की कमी है? हम कहाँ कमज़ोर हैं।
(1) कुफ़्फ़ार के लश्कर में खाने पीने का सामान बड़ी कसरत से था रोजाना 11 ऊंट ज़िबह करके खाते थे जबकि इस्लामी लश्कर में ज़ादे राह की यह हालत थी कि किसी के पास 7 तो किसी के पास 2 खजूरे थी
आज हमारे पास क्या नहीं है? बताइये! महीने भर का राशन भरा रहता है और पैसे एक्सट्रा रखे रहते है फिर भी हर जगह बेबस* है मारे काटे जलाए जा रहे है पता है क्यों? क्योंकि मुसलमान दीन से भटक रहा है अल्लाह पर से तवक्कुल हट रहा है 2 कौड़ी की चमचागिरी* में लगा है। अपना ईमान बेच रहा है।
(2) कुफ़्फ़ार के लश्कर में ऐश व इशरत का सामान भी काफ़ी तादाद में था यहाँ तक कि किसी पानी के किनारे पड़ाव करते तो ख़ैमे लगाते और उनके साथ गाने वाली तवाएफ़ें थी जबकि मुसलमानों के पास एक ख़ैमा तक नहीं था। सहाबा ए किराम ने खजूर के पत्तों और टहनीयों से एक झोंपड़ी तैयार करके हजूरे अकदस नबी ए करीम ﷺ को उसमें ठहराया आज उस जगह मस्जिद बनी हुई है।
नतीजा कुफ़्फ़ार के लश्कर से 70 आदमी कत्ल हुए जिनमें अबू जहल भी था 70 आदमी कैद हुए और इस्लामी लश्कर में 14 शहीद हुए और फ़तह मिली।
ऐ उम्मते मुस्लिमा अपने आमाल दुरूस्त कर! और आने वाले वक्त के लिए अपनी #नस्लों_को तैयार कर क्योंकि अब शरीयत पर हमला हो रहा है आगे और भी बहुत कुछ होने वाला है इसलिए अपनी घर की औरतों की हिफ़ाज़त करने की फ़िक्र के बजाए घर की औरतों को दीनी किताबें पड़ने को कहिये, टीवी सीरियल और बाॅलीउड़ की बेहुदा हवस की फ़िल्मों से दूर कर, घर से केबल की लानत से अपनी और अपनी नस्ल की हिफ़ाज़त कर ताकि वह इस्लाम को समझे और अपनी औलाद को फ़ौलादी बनाए।
लब्बैक या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैही वसल्लम





























































🙏paigame 🎠Imam 🙏Hussain👏
🌹अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बराकातहू🌹
अल्ला हुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिंव व अला आली
मुहम्मदिनकमा सल्ले-त अला इब्राही-म व अला आली
इब्राही-म इन-क हमीदुम मजीद
दीन अस्त हुसैन अ.स
♥️♥️♥️🌹🌹🌹♥️♥️♥️
5 रमजान यौमे विलादत मौला इमाम हसन अल मुजतबा अलैहिस्सलाम सभी मौहिब्बाने अहलेबैत عको बहुत बहुत मुबारक हो
♥️♥️♥️🌹🌹🌹♥️♥️♥️
वो आम करने इमामत का फैज़-ए-आम आये
जहाँ में आज मेरे दूसरे इमामع आये
मेरी जुबां से बरसेंगे फूल आज के दिन
बहुत खुश हैं अली عऔर बतूल سआज के दिन
हसन عआये हैं तक्मिल-ए-पंजेतन के लिये
दरूद का हैं मुसलसल नज़ूल आज के दिन
या आक़ा-ओ-मौला इमाम हसन अलैहिस्सलाम
इमाम हसन इब्ने अली अ.स. सिलसिला ए इमामत की दूसरी कड़ी हैं.
आप की विलादत 5 और कुछ रिवायतों में 15 रमजान 3 हिजरी को मदीना मुनव्वरा में हुई.
5 रमजान खानक़ाह ए आलिया नियाज़ीया के बुजुर्गो से और फज़ाईल-ए-अहलेबैत हुज़ूर मौहम्मद क़ासिम मियाँ क़िबला नियाज़ी साहब की जानिब और भी दीगर किताबों से हवाले मिलतें है आप की पैदाइश 5 रमजान है ।
आप मौला इमाम अली अलैहिस्सलाम और सय्यदा फातिमा ज़ेहरा सलामुल्लाह अलैहा के बड़े बेटे है
मौहम्मद मुस्तफा ﷺ और जनाबे खतीजा-ए- क़ुबरा सलामुल्लाह के बड़े नवासे है।और हज़रते अबुतालिब के बड़े पोते है.
आप का नाम :: हसन
लक़ब :: मुज्तबा
कुन्नियत :: अबु मोहम्मद
आप के लिए मौहम्मद मुस्तफा ﷺ ने फ़रमाया की आप जन्नती नवजवानो के सरदार है.आप की शान और मर्तबे के मुताल्लिक बहुत सी हदीस ए मुबारका मौजूद है।
ज़हरी र.अ कहते है की आप की विलादत बा सआदत रमज़ान हिजरत के तीसरे साल वाक़े हुई।
अल्लामा बिन साद ‘तबकात में और इब्ने अब्दुल बर ‘इस्तियाब में लिखते है की जनाब इमाम हसन अ.स. हिजरत के तीसरे बरस रमज़ान में और बाज़ के नज़दीक चौथे बरस और बाज़ के नज़दीक पांचवे बरस पैदा हुए है। और पहली बात ज़्यादा सही है.
हज़रत सलमान फारसी रज़ि से रिवायत है की हज़रत मौहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ ने फ़रमाया की हज़रत हारुन अलैहिस्सलाम ने अपने दोनों बेटो का नाम
शब्बर ओ शब्बीर रक्खा था
मैंने अपने दोनों बेटो का नाम हसन ओ हुसैन रक्खा है ..
हज़रत इमाम हसन अल मुजतबा अलैहिस्सलाम ताज़दारे मदीना सरवरे आलम हज़रत मौहम्मद मुस्तफा ﷺके और हज़रत बीबी खतीज़ा सलामुल्लाह अलैहा के बड़े नवासे है ।हज़रत अली करम अल्लाह वज़हू करीम अलैहिस्सलाम हज़रत बीबी फातीमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के बड़े बेटे और हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के बड़े भाई है।और पाँचवे खलीफा है ।और आप दुसरे इमाम भी है हसन आप का नाम और मुजतबा आप का लकब है
आप जन्नत के सरदार भी है।
हज़रत इमाम हसन अल मुजतबा अलैहिस्सलाम ने 25 हज पैदल किये ।
हसन बसरी कहते है इक रात मे खाना-ए-क़ाबा मे इबादत कर रहा था ।इक बुजुर्ग खाना-ए-काबा मे गिरया-ओ-जारी के साथ यानी रोते हुए अश्क़ बहाते हुए दुआ माँग रहे थे ।जब वो दुआ से फारिग हो कर जाने लगे तो मैने उनसे उनका नाम दर्याफ किया यानी पुछा वो फरमाने लगे मै हसन इब्ने रसूलुल्लाह हू ।हसन बसरी कहते हैं मेने इमाम ए हसन अलैहिस्सलाम को पकड़ कर अर्ज किया हुजूर इतनी गिरया ओ जारी तो ।आपने फरमाया ए हसन बसरी ये वो बारगाह है जो शहंशाह हे बे नियाज़ है ज्यादा तफसीली बात ना करते हुए ।आप के सवाल का जवाब देते हैं ।नबी के नूरे ऐन अली के दिल के चैन सय्यदा फातीमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के बड़े बेटे ताज़दारे जुदो शखा पैकरे शब्रो रज़ा हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम ने पैदल 25 हज किये ।चुनाचे इमाम हाकिम की रिवयात है उसमे मुसतादरिक सफा नंबर 169 लिखा है आप ने 25 हज पैदल किये ।जिल्द नंबर 3 सादातुल कोनैन सफा नंबर 54 हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम जब हज के लिये तशरीफ ले जाते तो पैदल ही जाते थे ।हाला के आप के पास सवारीया भी थी लेकिन फिर भी सवार नही होते थे ।मदीना मुनव्वरा से पैदल ही तशरीफ ले जाते थे और फरमाते थे खुदा के घर मे जाते हुए सवार होकर जाने मे मुझे शर्म आती है ।किताब नाम अल बदाया वन्नेहा सफा न,37 जिल्द नम्बर 8 सवायेके मोहर्रिका सफा नम्बर 137और तारीख की दिगर किताबो मे येही है के दोनो भाईयो ने यानी इमाम हसन अलैहिस्सलाम और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने 25-25 हज पैदल किये ।किताब का नाम 12 इमामैन सफा नम्बर 286 ।
ये सभी रिवायते सही सनद के साथ है और रावी कोन वो भी आप के सामने पेश कर दिये ।और आप ने 20 हज किये उसकी कोइ सही सनद रावी मौजुद नही है ।
फिर भी किसी के पास सही रावी से सही सनद हो के आप ने 20 हज किये तो आप वो सनद से पेश कर सकते हो ।

Abu Rafi’ reported: I saw the Messenger of Allah, ﷺ pronounce the call to prayer in the ear of (Sayyiduna) Hasan ibn Ali when he was born.
-The Beloved Messenger of Allah ﷺ
Ref: Sunan Tirmidhi
15 Ramazan Kareem
Imam Maula Hasan (عليه السلام) Ki
Wiladat Bahot Bahot Mubarak Ho
Ibne Abbas Se Riwayat Hai
Ek Baar RasoolAllah (صلى الله عليه وآله وسلم)
Imam Hasan (عليه السلام) Ko Apne
Kandhe Par Bithaye Huwe The,
Kisi Sahabi Ne Kaha Aye Sahabzaade
Aapki Sawari Bahot Acchi Hai
To Aaqa Ne Farmaya Sawaar
Bhi To Accha Hai..
Reference :
(Tarikh e Khulfa)
Bitha Kar Shaanae Aqdas
Pe Kardi Shaan Do Baala,
Nabi Ke Laadlon Par Har
Fazeelat Naaz Karti Hai..
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى سَيِّدِنَا مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ سَيِّدِنَا مُحَمَّد

Tadhkira-e Imam Hasan Al-Mujtaba ‘Alayh-is-Salam
Aap ‘Alayh-is-Salam Baara A’immah Me Se Dusre Imam Hain. Aap ‘Alayh-is-Salam Ka Naam Naami Isme Girami : “Hasan” Kunyat : “Aboo Muhammad” Alqabat : “Taqi, Zaki, Sayyid Mujtba, Shabihe Rasool” Wagaira Hain.
Hazrat Imam Hasan ‘Alayh-is-Salam Kee Wildate Ba-Sa’adat Hijrat Ke Teesre Saal 15 Ramdan-ul-Mubarak Ko Madinah Munawwarah Me Huwi. Huzoor Rahmat-E-Aalam SallAllahu Ta’ala ‘Alayhi Wa Aalihi Wa Sallam Ne Hazra Imam Hasan ‘Alayh-is-Salam Kee Wiladat Se Phele Hazrat Ummi Salamah Aur Hazrat Asma’ Binte Umays RadiyAllahu Ta’ala ‘Anhuma Ko Hukm Diya Ki Tum Ne Meri Beti Fatimah Ke Paas Rehna Hai Aur Jab Un Ke Haa’n Baccha Paida Ho Jaaein To Mujhe Khabar De Dena. Mere Aane Tak Koi Kaam Na Karna. Chunanche Huzoor Nabiyye Karim SallAllahu Ta’ala ‘Alayhi Wa Aalihi Wa Sallam Tashrif Farma Huwe Aur Apna Lu’aab Dahan Mubarak Hazrat Imam Hasan ‘Alayh-is-Salam Ke Moonh Mubarak Me Daala Aur Phir Ye Du’aa Farmayi : Aye Allah! Mein Is Ko Teri Panaah Me Deta Hoo’n Aur Is Kee Aulaad Ko Bhi Us Shaytaan Ke Sharr Se Jo Teri Bargah Se Raanda Gaya Hai.
Nabi Karim SallAllahu Ta’ala ‘Alayhi Wa Aalihi Wa Sallam Ne Aap Ka Naam “Hasan” Rakha. Wiladat Ke Saatwe Din Aap Ka Aqiqa Kiya, Baal Mundwaein Aur Hukm Diya Ki Baalo’n Ke Wajn Ke Barabar Chaandi Sadqa Kee Jaaein. Hazrat Imam Hasan ‘Alayh-is-SalamShakal Wa Soorat Me Sar Se Le Kar Paaun Tak Khwaja-E-Kawnayn Muhammad Mustafa SallAllahu Ta’ala ‘Alayhi Wa Aalihi Wa Sallam Ke Mushaabeh They. Hazrat Aboo Bakar RadiyAllahu Ta’ala Anhu Se Riwayat Hain : Nabiyye Akram SallAllahu Ta’ala ‘Alayhi Wa Aalihi Wa Sallam Sahaba Ko Namaz Padha Rahe They Aur Jab Aap Sajde Me Jaate To Hazrat Hasan Bin Ali Aap Kee Pushte Mubarak Par Khel Rahe Hote Kai Dafa Aisa Huwa, Sahaba Ne Arz Kiya : Hum Ne Aap Ko Ye Mu’amala Kisi Aur Se Karte Huwe Nahin Dekha, Farmaya : Mera Yeh Beta Sardar Hain Anqareeb Allah Ta’ala Is Ke Zari’e Musalmano’n Ke Do Azim Giroh Me Sulh Karwaega. Aap ‘Alayh-is-Salam Ke Zamana-E-Khilafat Me Aik Aadami Ne Namaaz Kee Haalat Me Aap Par Hamla Kar Diya Aur Sajde Me Aap Par Khanzar Ka Waar Kiya. Aap Ne Khutba Farmaya : Aye Ahle Iraq Hamaare Baare Me Allah Ka Taqwa Ikhtiyaar Karo. Hum Aap Ke Ameer Aur Mehmaan Bhi Hain. Aur Hum Woh Ahl-E-Bayt Hain Jin Ke Muta’alliq Allah Ta’ala Ne Farmaya Hai : إِنَّمَا يُرِيدُ اللَّهُ لِيُذْهِبَ عَنْكُمُ الرِّجْسَ أَهْلَ الْبَيْتِ وَيُطَهِّرَكُمْ تَطْهِيرًا Aap Is Aayat Ko Baar Baar Padhte Rahe Yaha’n Tak Ki Tamam Ahle Masjide Ro Pade.”
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[Ibn Hajar Makki Fi As-Sawa’iq Al-Muhriqah ‘Ala Ahl Al-Rafd Wa Al-Dalal Wa Al-Zandaqah, Shablanji Fi Noor-ul-Absar Fi Manaqibi Aali Bayt-in-Nabiyy-il-Mukhtar, Al-Sharaf Al-Mu’bbad Li-Al-Muhammad, Jami’ Fi Shawahid-un-Nubuwwah.]

क्या हम सैय्यदना इमामे हुसैन अलैहिस्सलाम के बड़े भाई और उम्मत के पांचवें ख़लीफ़ा ए राशिद सैय्यदना इमाम हसन अलैहिस्सलाम को भूल गए हैं ???
रोज़े क़यामत अगर रसूलुल्लाह صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم ने हमसे पूछ लिया कि मैंने तो अपने दोनों नवासों को लुआब ए दहेन कि घुट्टी दी थी दोनों को अपने कांधे मुबारक पर उठाया था दोनों को जन्नत का सरदार बनाया था तो तुम लोगों ने मेरे “हसन” को क्यों फ़रामोश कर दिया क्यों भुला दिया ???
याद रहे आपकी शहादत 28 सफ़र को हुई
(28 सफ़र यौमे शहादत सैय्यदना इमाम हसन अलैहिस्सलाम)
सैय्यदना इमामे हसन उम्मत के पांचवें ख़लीफ़ा ए राशिद हैं आप मनसब ए ख़िलाफ़त पर तक़रीबन 6 माह फ़ाइज़ रहे और इमामत पर हमेशा फ़ाइज़ रहेंगे
सैय्यदना इमामे हसन ने उम्मत को बचाने की लिए इख़्तेदार को ठोकर मार दी ताकि मुसलमानों का ख़ून न बहे
सैय्यदना इमामे हसन के ज़िक्र को दुश्मने अहलेबैत दबाते छुपाते हैं
याद रहे हदीस ए रसूल ﷺ है कि मेरे बाद ख़िलाफ़त 30 साल तक रहेगी फिर बादशाहत का दौर शुरू होगा (मुसन्द अहमद,तिर्मिज़ी,अबु दाऊद)
सही रिवायतों और मुस्तनद तारीख़ी किताबों में ख़िलाफ़त ए राशिदा की 30 साल तक कि मुद्दत को इस तरह बयान किया गया है
1- हज़रत अबु बकर सिद्दीक़ रदिअल्लाहो अन्हो की ख़िलाफ़त का ज़माना 2 साल 4 माह
2- हज़रत उमर फ़ारूक़ रदिअल्लाहो अन्हो की ख़िलाफ़त का ज़माना 10 साल 6 माह
3- हज़रत उस्मान ए ग़नी रदिअल्लाहो अन्हो की ख़िलाफ़त का ज़माना चन्द रोज़ कम 12 साल
4- हज़रत मौला अली कर्मअल्लाहो वजहुल करीम की ख़िलाफ़त का ज़माना 4 साल 9 माह
इस तरह चारो ख़ुल्फ़ा की मुद्दत ए ख़िलाफ़त तक़रीबन
29 साल 7 माह बनती है
5- हज़रत सैय्यदना इमामे हसन अलैहिस्सलाम की ख़िलाफ़त का ज़माना 5 माह चन्द दिन (आपकी ख़िलाफ़त के ज़माने को मिला कर ख़िलाफ़त ए राशिदा के 30 साल मुकम्मल हुए)
सैय्यदना इमामे हसन अलैहिस्सलाम इस उम्मत के दूसरे इमाम और पांचवे ख़लीफ़ा ए राशिद है!
हक मौला हसन या मौला हुसैन

Imam Hasan WO HAIN Jinki Wiladat (Birth) ka Zikr Quran me hai!!
Marajal Bahrain!
“Jab Sayyeda-e-Kainat aur Maula Ali al Murtaza ka Nikah hua to Ye 2 Samundar Mile. Ek Samundar Ismat o Taharat-e-Sayyeda Fatimah aur Dusra Samundar-e-Wilayat-e-Maula Ali al Murtaza. “Marajal Bahraine Yaltaqiyaan” (Surah Rahman) Jab Ye 2 Samundar mile aur Inke Darmiyan Waseela Parda ka Wo Mustafa ki Zaat Hai. To Jab Ye Samundar Miley to Inke Milne se 2 Chizen Niklin “Lu’alu wal Marjaan” Ek moti nikla ek marjaan nikla. Agar aapko pata ho to moti seep me hota hai aur samundar ki lehren lag lag lagkar us moti ko mas hohokar uspar sabz (green) rang ki jhalak aajati hai. Agar sachha aur suchha moti dekhna ho to is tarah dekho jisme sabz jhalak nazar aaye, samjhlo khaalis moti hai! jisme sabz jhalak na ho wo khaalis moti nahi. To usme se “Lu’alu” sabz rangat waala Moti nikla, sabz rangat zehar ki thi ye Hasan-e-Mujtaba they! Aur “Wal Marjaan” Marjaan ka rang surkh (red) hota hai, Ye Khoon-e-Hussain ka Rang tha!
Behr-e-Wilayat aur Behr-e-Ismat o Taharat Miley Batasadduq-e-Mustafa, Us Nikah ke Hijab se Miley to Hasan Moti banke nikley aur Hussain Marjaan banke nikley!”
Alaihim Afdalus Salawatu was-Salaam
-Shaykh-ul-Islam Dr. Tahir-ul-Qadri
Allahumma Salle Ala Sayyedina wa Maulana Muhammadiw wa Ala Sayyedina Aliyyuw wa Sayyedatina Fatimah wa Sayyedatina Zainab wa Sayyedina Hasan wa Sayyedina Hussain wa Ala Aalihi wa Sahbihi wa Baarik wa Sallim
